Sawan 2022: भगवान शिव को क्यों कहा जाता है 'नीलकंठ'?

Updated : Aug 12, 2022 15:14
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Editorji News Desk

पौराणिक कथा के अनुसार अमृत पाने की इच्छा से जब देव-दानव बड़े जोश और वेग से मंथन कर रहे थे, तभी समुद से कालकूट नामक भयंकर विष निकला. उस विष की अग्नि से दसों दिशाएं जलने लगीं. देवताओं और दैत्यों सहित ऋषि, मुनि, मनुष्य, गंधर्व और यक्ष आदि उस विष की गरमी से जलने लगे. देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान शिव विषपान के लिए तैयार हो गए. उन्होंने भयंकर विष को हथेलियों में भरा और भगवान विष्णु का स्मरण कर उसे पी गए. भगवान विष्णु अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं. उन्होंने उस विष को शिवजी के कंठ (गले) में ही रोक कर उसका प्रभाव खत्म कर दिया. विष के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और वे संसार में नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए.

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