Sedition law: देशभर में राजद्रोह कानून एक बार फिर चर्चा में है. एक तरफ आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में राजद्रोह के केस दर्ज हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर ही सवाल उठा दिया है.
कोर्ट ने पूछा है कि 75 साल बाद भी ये कानून आखिर मौजूद ही क्यों हैं? अभी हाल ही में हरियाणा के सिरसा में विधानसभा उपाध्यक्ष पर भी हमला करने को लेकर 100 से ज्यादा लोगों पर राजद्रोह के तहत FIR दर्ज की गई है.
हालांकि देश में ऐसे दर्जनों मामले आए हैं जिसमें कोर्ट ने आरोपी को बरी किया है. हाल ही सामने आया वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ और दिशा रवि का मामला सभी को याद होगा ही.
ऐस में ये जानना दिलचस्प होगा आखिर ये राजद्रोह कानून (Sedition law) है क्या? इसे कब और किन हालातों में बनाया गया, कितना लग सकता है जुर्माना कितनी मिलती है सजा, और अब क्यों छिड़ा है इस कानून पर विवाद? आइए जानते हैं सारे सवालों के जवाब
1. भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124-A में राजद्रोह (Sedition law) का उल्लेख है
2. सरकार के खिलाफ लिखना, बोलना, प्रचारित या उसका समर्थन करना राजद्रोह है
3. ऐसा एक्शन जिससे शांति भंग हो, राजद्रोह की श्रेणी में आता है
4. राष्ट्रीय प्रतीक और संविधान का अपमान करने की कोशिश भी राजद्रोह
5. दोष साबित होने पर 3 साल की कैद या जुर्मान या फिर दोनों
6. इस कानून के तहत अधिकतम सजा उम्रकैद भी हो सकती है
1. अंग्रेजों ने 1870 के दशक में राजद्रोह कानून भारत में लागू किया
2. जिसका मकसद सरकार के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाना था
3. 1897 में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के खिलाफ इसका इस्तेमाल
4. 1922 में महात्मा गांधी के खिलाफ भी राजद्रोह कानून का हुआ इस्तेमाल
5. खास बात ये है कि ब्रिटिश सरकार में बना ये कानून अब ब्रिटेन में भी खत्म
1. क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि, शफूरा जरगर की हुई थी गिरफ्तारी
2. डॉ. कफील खान को भी राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था
3. सीनियर जर्नलिस्ट विनोद दुआ पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस मुकदमे को खारिज कर दिया था. उस वक्त भी इस कानून को खत्म करने को लेकर लंबी बहस छिड़ी थी
1. सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई हो रही है
2. SC ने इस कानून की मौजूदगी को लेकर सरकार से तीखे सवाल किए
3. कोर्ट ने पूछा आजादी के 75 साल बाद अब भी इस कानून की जरूरत क्या है
4. सरकार कई बासी कानूनों को निकाल चुकी है, फिर इस पर गौर क्यों नहीं किया गया
5. इस बाबत कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है
6. SC की टिप्पणी के बाद इस कानून को रद्द करने पर फिर से बहस छिड़ गई है
1. इस कानून को रद्द करने के बजाए इसके उपयोग पर पैरामीटर निर्धारित हो
जुलाई 2019 में केंद्र ने संसद में कहा था कि वो खत्म नहीं करेगी राजद्रोह कानून
2. राष्ट्र-विरोधी, पृथकतावादी और आतंकवादी तत्वों से निपटने के लिए ये प्रभावी