चकाचौंध वाली मुंबई नगरी में सोमवार सुबह पावर ग्रिड की वजह से कई घंटे अंधेरा छाया रहा. ट्रेनें ठप हो गईं और दफ्तरों में काम रूक गया, घरों में लोग परेशान हो गए. आखिर क्या है ये पावर ग्रिड ? और कैसे फेल हो जाती है पावर ग्रिड ....जानें यहां.
क्या होती है पावर ग्रिड?
पावर ग्रिड बिजली की लाइनों का एक नेटवर्क होता है
बिजली प्रोडक्शन से लेकर सप्लाई होने तक यूज होनेवाला नेटवर्क
इसके जरिए उपभोक्ता तक बिजली की सप्लाई की जाती है
पावर ग्रिड के तीन स्टेज
पावर जनरेशन- अलग-अलग तरीकों से बिजली का उत्पादन
नदियों पर बांध बनाकर, कोयला या हवा से बिजली बनाई जाती है
पावर ट्रांसमिशन- करार हुए राज्यों या इलाकों में सप्लाई होती है
पावर डिस्ट्रीब्यूशन- संबंधित पॉवर स्टेशनों से ग्राहकों तक सप्लाई
कैसे फेल होती है पावर ग्रिड?
लिमिट से ज्यादा पावर की सप्लाई होने से ग्रिड फेल होती है
भारत में बिजली का ट्रांसमिशन 49-50 हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर
फ्रीक्वेंसी के हाई या लो लेवल होने पर पावर ग्रिड फेल होने की आशंका
ट्रांसमिशन लाइन पर ब्रेकडाउन हो जाता है और सप्लाई ठप हो जाती है
बिजली सप्लाई की जानेवाली स्टेशनों की फ्रीक्वेंसी पर होती है खास नजर
इन स्टेशनों को 48.5 से 50.2 हर्ट्ज के बीच फ्रीक्वेंसी रखनी होती है
नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर इसके लिए राज्यों पर नजर रखता है
कई बार लिमिट से ज्यादा पावर की सप्लाई होने पर भी संकट होता है
भारत में कुल 5 ग्रिड
नॉर्थर्न ग्रिड- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, J&K, चंडीगढ़
ईस्टर्न ग्रिड- पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम
नॉर्थ-ईस्टर्न ग्रिड- अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा
वेस्टर्न ग्रिड- महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा
साउथर्न ग्रिड- तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पुड्डुचेरी