खाने की चीज को खरीदते वक्त उसकी पैकेजिंग पर या फिर डायट चार्ट बनाते वक्त डायटिशियन से ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) का ज़िक्र तो आपने यकीनन सुना या पढ़ा ही होगा. पर क्या आपको पता है कि आखिर ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता क्या है?
आसान शब्दों में समझा जाए तो ग्लाइसेमिक इंडेक्स कार्बोहाइड्रेट वाली खाने की चीजों की रैंकिंग है जिससे ये पता लगाया जाता है कि ये इंडेक्स 0 से 100 के बीच होता है. ग्लाइसेमिक इंडेक्स जितना कम होगा, ब्लड शुगर उतना ही कम होगा. यूं कह लें कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक तरह का जरूरी टूल है जिससे ये तय किया जाता है कि एक इंसान को अपने डायट में क्या शामिल करना चाहिए और डायबिटीज जैसी बीमारियों में खाने की चीजों का क्या अनुपात होना चाहिए?
Glycemic Index Foundation (GIF) खाने की चीजों को 3 GI कैटेगरी में बांटता है. 55 या उससे कम रैंकिंग वाली चीजों को लो ग्लाइसेमिक माना जाता है. 56-59 को मध्यम जीआई तो वही 70 से ऊपर की किसी भी चीज़ को हाई जीआई माना जाता है.
कम जीआई वाली खाने की चीजें धीरे-धीरे पचती हैं और ब्लड शुगर को स्थिर रखती हैं. ये आमतौर पर फाइबर, प्रोटीन से भरपूर होती है, कम जीआई वाले चीजों में सेब (28), सब्जियां जैसे पालक, सेलेरी, खीरा, टमाटर (15) के साथ साथ मूंगफली (21) और दाल (41) शामिल हैं.
जिन खाद्य पदार्थों को हाई जीआई की कैटेगरी में रखा जाता है वो अधिकतर प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट और शुगर से भरे होते हैं. व्हाइट ब्रेड (79), कॉर्न फ्लेक्स(77), तरबूज (72) और अनानास (66) के साथ-साथ सूखे मेवे जैसे खजूर(100) हाई जी आई इंडेक्स की लिस्ट में आते हैं.
हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि आप सिर्फ लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें ही खाएं. ये रैंकिंग लोगों को उनकी डायट की जरूरतों के आधार पर खाने की चीजों को चुनने में मदद करती है और ये कंट्रोल करती है कि आप कितना शुगर और कार्बोहाइड्रेट ले रहे हैं. क्योंकि अंत में ये जरूरी है कि जानकारी के साथ छोटी-छोटी सभी जरूरी पोषक तत्व से भरपूर एक बैलेंस्ड डायट लेना किसी भी तरह के डायट ले लेने से कहीं बेहतर है