बढ़ती जनसंख्या, विकास में एक बड़ी बाधा है. इससे कोई इनकार नहीं करता. जनसंख्या पर लगाम लगेगी तो सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल, दवाई और पढ़ाई समेत तमाम संसाधनों का लाभ सबको बेहतर तरीके से मिल सकेगा. लेकिन यूपी में योगी सरकार द्वारा लाए गए जनसंख्या नियंत्रण कानून का जितना स्वागत हो रहा है उतना ही विवाद भी हो रहा है. विरोधी तो विरोधी अपने भी सरकार पर निशाना साध रहे हैं. ऐसे में जानते हैं क्या है इस कानून के ड्राफ्ट में और क्यों हो रहा है इसपर विवाद?
क्या है जनसंख्या नियंत्रण कानून ड्राफ्ट?
- राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने इसे तैयार किया
- साल 2026 तक जन्मदर प्रति हजार आबादी पर 2.1 करने का लक्ष्य
- साल 2030 तक की पॉपुलेशन पॉलिसी ड्राफ्ट में जन्मदर को 1.9% तक करने का लक्ष्य
- 21 साल से ऊपर के युवक और 18 साल से ऊपर की युवतियों पर लागू होगा कानून
- वन चाइल्ड पॉलिसी को बढ़ावा, दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी सुविधाएं नहीं
- जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए स्कूल से ही इसपर पढ़ाई की जाएगी जरूरी
- यदि किसी महिला को दूसरी प्रेग्नेंसी में जुड़वा बच्चे होते हैं तो कानून से छूट मिलेगी
- 19 जुलाई तक राय दे सकेंगे लोग, इसके बाद सदन में रखा जाएगा फाइनल ड्राफ्ट
आइए अब आपको बताते हैं इसे लेकर उठ रहे सवाल और उनके जवाब
-वन चाइल्ड पॉलिसी में क्या इंसेंटिव?
नौकरी और प्रमोशन में फायदा
BPL परिवारों में लड़की होने पर 1 लाख की प्रोत्साहन राशि
लड़का होने पर 77 हजार रुपये मिलेंगे
बेटी की पूरी पढ़ाई मुफ्त होगी, बेटे को 20 साल तक मुफ्त शिक्षा
उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरियों में वरीयता
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- दो से अधिक संतान होने पर क्या नुकसान होगा?
- सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे
- पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे
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- सरकारी नौकरी वालों के लिए क्या-क्या प्रावधान?
दो बच्चों वाले कर्मचारी को सर्विस के दौरान दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि
12 महीने का मातृत्व या पितृत्व अवकाश दिया जाएगा
जीवन साथी का बीमा सरकार करवाएगी, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी
एक बच्चे वाले कर्मचारी को चार अतिरिक्त इन्क्रीमेंट दिया जाएगा
अब जान लेते हैं इस कानून को लेकर क्या विवाद हैं. दरअसल इस कानून के ड्राफ्ट के 12 वें से लेकर 15 वें पेज पर बहु विवाह की शर्तों पर विस्तार से लिखा गया है. वैसे तो ये सब पर लागू होगा लेकिन चूंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बहुविवाह की इजाज़त देता है लिहाजा इसे लेकर विवाद बढ़ गया है. आइए जानते हैं कि ये क्या है?
- बहु विवाहित जोड़ों पर लागू शर्तों पर विवाद
एक शख़्स की अगर दो पत्नियां हैं तो केवल दो बच्चे ही मान्य होंगे
दोनों पत्नियों से अगर दो-दो बच्चे हों तो सरकारी सुविधाएं नहीं मिलेंगी
दरअसल असम में भी जब नया जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया गया तो निशाने पर मुस्लिम समाज आए...यूपी में भी ऐसी धारणा बनाने की कोशिश हो रही है लेकिन आंकड़े कुछ और ही हकीकत बयान करते हैं.
यूपी की साल 2011 की जनगणना?
- उत्तर प्रदेश में औसतन हर महिला के 3.15 बच्चे हैं
- हिंदू महिलाओं के औसतन 3.06 बच्चे हैं और मुस्लिम महिलाओं के 3.6
- 44.2% हिंदू महिलाओं के 2 या 2 से अधिक बच्चे हैं जबकि मुस्लिमों में ये प्रतिशत 40.38% ही है
जाहिर है बढ़ती जनसंख्या को सीधे एक धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता. दूसरी अहम बात इसकी टाइमिंग को लेकर है जो इसे चुनावी तिकड़म ज्यादा बनाती है. कई एक्सपर्ट्स इस क़ानून का स्वरूप तानाशाही से भरपूर मानते हैं. खुद BJP की सहयोगी JDU के मुखिया नीतीश कुमार का कहना है कि सिर्फ कानून बना कर जनसंख्या को नियंत्रित नहीं किया सकता है, इसके लिए महिलाओं की बढ़िया शिक्षा बहुत जरूरी है. वैसे चीन का उदाहरण तो यही बताता है कि कानूनन सख्ती करने का लंबे समय में दुष्परिणाम ही सामने आता है. चीन को भी अपनी वन चाइल्ड पॉलिसी में ढील देनी पड़ी क्योंकि धीरे धीरे युवा देश से खत्म होने लगे, यही नहीं एक लड़का या लड़की पर अपने दो पिता और 4 ग्रैंड पेरेंट्स को देखने की जिम्मेदारी भी आन पड़ी जिसने बहुत सी मुश्किल खड़ी कर दी.