चांद का जब भी ज़िक्र आता है तो सफ़ेद रंग का बड़ा सा गोल आकार हमारे ज़ेहन में आ जाता है. लेकिन अगर आपसे मैं पूछूं कि क्या आपने सुर्ख लाल रंग का चांद देखा है तो अब मेरे इस सवाल का जवाब भी आप हाँ में ही देंगे. 26 मई को आपने ज़रूर इस अद्भुत नज़ारे को देखा होगा. जब थोड़ी देर के लिए चाँद ब्लड रेड कलर का हो गया था और दुनिया भर से इस खूबसूरत नज़ारे की तस्वीरें सामने आयीं थीं. चलिए अब सबसे पहले समझते हैं क्या है सुपरमून?
क्या होता है सुपरमून?
आम दिनों के मुकाबले चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है इस वजह से आज चन्द्रमा अपने आकर में 12 प्रतिशत तक बड़ा और लगभग 15 प्रतिशत चमकीला दिखाई देगा. आप सबने पढ़ा होगा कि चन्द्रमा एक अंडाकार ऑर्बिट में पृथ्वी के चक्कर लगाता है. जिसके कारण पूरे साल चन्द्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी घटती और बढ़ती रहती है. इस ऑर्बिट का जो हिस्सा पृत्वी के सबसे करीब होता है उसे पेरिजी कहते हैं और जो सबसे दूर होता है उसे एपोजी कहते हैं. चन्द्रमा अपनी पेरिजी पर पहुंचता है तो पृथ्वी से उसकी दूरी घट जाती है और तभी सुपरमून दिखाई देता है. चांद को सुपरमून तभी कहा जाता है जब वो पृथ्वी से 360000 किलोमीटर या उस से कम दूरी पर हो. यानी सुपरमून की 2 शर्तें हैं; पहली चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक हो और दूसरी उस दिन पूर्णिमा भी हो. इसे ब्रिटेन में Flower Moon भी कहते हैं क्योंकि मई के महीने से ही फूल खिलने शुरू होते हैं. नासा के अनुसार, सुपरमून शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1979 में एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नॉले ने किया था.
पूर्णिमा और सुपरमून में क्या रिश्ता है?
ये थोड़ा टेक्निकल है लेकिन व्हलिये इसे समझते हैं चाँद को पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में 27 दिन का वक़्त लगता है और 29 दिन 5 घंटे में एक पूर्णिमा होती है दिन में एक बार पूर्णिमा भी आती है. हर पूर्णिमा को सुपरमून नहीं होता, पर हर सुपरमून पूर्णिमा को ही होता है
ब्लड मून क्या होता है?
26 मई को एक साथ दो खगोलीय घटनाएं घटीं. एक सुपरमून और दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण. आपने बचपन में लाइट के सात रंगों के बारे में पढ़ा होगा. जब लाइट रेज़ प्रिज्म से गुजरती है तो वह सात रंगों में टूट जाती है. वॉयलेट (V), इंडिगो (I), ब्लू (B), ग्रीन (G), यलो (Y), ऑरेंज (O) और रेड. वॉयलेट (बैंगनी) की वेवलेंग्थ सबसे कम होती है और लाल की सबसे ज्यादा. चंद्रग्रहण के दौरान सूरज और चांद के बीच पृथ्वी आ जाती है. तब पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चांद तक पहुंचने से रोक देती है. लेकिन सबसे ज़्यादा वेवलेंग्थ वाला लाल रंग छितराकर चांद की सतह पर गिरता है और इसका रंग लाल नज़र आता है.