स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 26 मई तक भारत में कोविड से मौतों की कुल संख्या 3,11,388 रही, जबकि कुल संक्रमितों की संख्या रही 2,71,57,795. लेकिन क्या यही है असली संख्या इसे लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, बहुत सी रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मौतों और कुल केस के सरकारी आंकड़े असल आंकड़ों से काफी कम हैं. अब न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक दर्जन से भी अधिक विशेषज्ञों से सलाह लेकर भारत में कोविड-19 से हुई कुल मौतों और कुल संक्रमण को लेकर कुछ आंकड़े जारी किए हैं. सीरो सर्वे पर आधारित इस स्टडी में असल आंकड़ों को लेकर 3 तरह के अनुमान लगाए गए हैं, ये सरकारी संख्या से 15 से 26 गुना ज्यादा हैं.
स्टडी के मुताबिक अगर बहुत कम अनुमान भी लगाया जाए तो कुल केस सरकारी आंकड़े से 15 गुना अधिक होंगे जबकि डेथ रेट 0.15% होगी. इसके मुताबिक 24 मई तक कुल कोरोना केस 4.04 करोड़ होंगे तो वहीं कुल मौतें करीब 6 लाख.
स्टडी ने दूसरी संख्या रखी है 'अधिक अनुमान' कैटेगरी की. स्टडी के मुताबिक इस कैटेगरी में ये आशंका जताई गई है कि सरकारी आंकड़े से 20 गुना ज्यादा इंफेक्शन होगा, जबकि डेथ रेट 0.30% होगी. यानि 5.39 करोड़ केस जबकि 16 लाख मौतें.
स्टडी में तीसरी कैटेगरी है 'खराब हालत' की, ऐसी हालत में कुल संक्रमण सरकारी संख्या से 26 गुना अधिक हो सकता है, जबकि डेथ रेट 0.60% होने का अनुमान है. मतलब 7 करोड़ संक्रमण और 42 लाख मौतें
NYT की स्टडी में भारत में कराए गए तीनों सीरो सर्वे को विशेषज्ञों ने अनुमान का अहम आधार बनाया है. सीरो सर्वे के मुताबिक देश में कोरोना केसों और मौतों की असली संख्या सरकारी आंकड़ों से 13.5 गुना से लेकर 28.5 गुना तक ज्यादा थीं.
अनुमान का आधार
देश में बीते साल तीन सीरो सर्वे हुए हैं. NYT ने अपनी स्टडी में इन्हें अहम आधार बनाया है. 11 मई से 4 जून 2020 को हुए सीरो सर्वे के मुताबिक सरकारी कन्फर्म केस थे 2,26,713. जबकि सर्वे के मुताबिक कुल अनुमानित केस थे 64.6 लाख, सरकारी और सीरो सर्वे के आंकड़ों में 28.5 गुना का फर्क रहा.
18 अगस्त से 20 सितंबर 2020 का सर्वे - सरकारी कन्फर्स केस 54.9 लाख, अनुमानित वास्तविक केस 7.43 करोड़, फर्क रहा 13.5 गुना.
18 दिसंबर 2020 से 6 जनवरी 2021 - सरकारी कन्फर्स केस 1.04 करोड़, अनुमानित असल संख्या 27.1 करोड़, फर्क रहा 26.1 गुना
स्टडी में शामिल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये सीरो सर्वे तो भारत में पहली लहर के हैं, दूसरी लहर कहीं ज्यादा खतरनाक रही है और इस दौरान अगर सीरो सर्वे होता तो संख्या और ज्यादा आती. यही नहीं स्टडी में शामिल विशेषज्ञों का मानना है भारत में सीरो सर्व के नतीजे भी वास्तविक स्थिति से कम हो सकते हैं.