ओलिंपियन सुशील कुमार (Sushil Kumar) की जेल के अंदर प्रोटीन (Protein) वाला भोजन दिए जाने की मांग को दिल्ली की एक अदालत ने खारिज कर दिया है. मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सतवीर सिंह लांबा ने कहा कि प्रोटीन वाला आहार और विशेष भोजन सिर्फ इच्छा हैं आवश्यक जरूरत नहीं. लांबा बोले कि दिल्ली जेल कानून 2018 के तहत जेलों में आरोपियों की जरूरतों का ख्याल रखा जाता है.
कोर्ट ने कहा कि कानून के लिए सभी व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, लिंग, वर्ग आदि से संबंधित हो, बराबर होता है और समानता संविधान की मूल विशेषता है. सुशील कुमार के वकील प्रदीप राणा ने अदालत से मांग की कि सुशील कुमार गैर सजायाफ्ता आपराधिक कैदी है और अपने खर्च पर उन्होंने प्रोटीन वाले भोजन की मांग की है, इसलिए उन्हें इसकी मंजूदी दी जाए.