सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साफ किया है कि लोन मोरेटोरियम (Lone moratorium) को और नहीं बढ़ाया जा सकता और न ही इस दौरान ब्याज को पूरी तरह से माफ किया जा सकता है. बैंक के इस फैसले से बैंकों को राहत मिली है लेकिन रियल एस्टेट (Real estate) जैसे कई सेक्टर की कंपनियों के साथ-साथ आम लोगों को भी झटका लगा है.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ किया है कि लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज नहीं वसूला जाएगा. अगर ब्याज पर ब्याज वसूला गया है तो उसे अगली ईएमआई में एडजस्ट किया जाएगा. जानबूझकर डिफॉल्ट करने के मामले में चक्रवृद्धि ब्याज चार्ज किया जाएगा.
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कोरोना महामारी (Corona epidemic) से सिर्फ कंपनियों को ही नहीं, सरकार को भी नुकसान हुआ है. सरकार को आर्थिक फैसले लेने का अधिकार है. कोर्ट केवल यह तय कर सकता है कि कोई पॉलिसी कानून सम्मत है या नहीं. कोर्ट ने कहा कि 31 अगस्त के बाद मोराटोरियम की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती.