सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें नाबालिग की ब्रेस्ट को 'स्किन टू स्किन' कॉन्टैक्ट के बिना छूना POCSO के तहत बाल यौन अपराध नहीं माना गया था. टॉप कोर्ट ने यूथ बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये रोक लगाई है. अपने फैसले में नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला की सिंगल बेंच ने ये विवादित फैसला सुनाते हुए आरोपी को POCSO अधिनियम की धारा 8 के तहत बरी कर दिया था, जिसमें उसे लोअर कोर्ट से 3 साल की सजा मिली थी. इस फैसले पर, ना सिर्फ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आपत्ति जाहिर की थी, बल्कि समाज के हर तबके से इस फैसले का विरोध हुआ था और इसे बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाला बताया गया. 2016 के इस केस में 12 साल की बच्ची का यौन शोषण हुआ था, दोषी ने बच्ची को ना सिर्फ ग्रोप किया था बल्कि उसके कपड़े भी उतारने की कोशिश की थी.