हिंदुस्तान आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और सभ्यता-संस्कृति की दृष्टि से सबसे पुराना देश है. भारत में हिंदी समझने और बोलने वालों की संख्या करीब 70 करोड़ है. 1940 के दशक में सभी बड़े देश मानते थे कि भारत जब भी स्वतंत्र होगा उसे विश्व समुदाय में समुचित स्थान देना होगा और उसके साथ उसी की भाषा में बात करनी होगी. हिंदी ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम की भाषा थी. उस समय सभी एकमत थे कि हिंदी ही स्वतंत्र भारत की राष्ट्रभाषा होगी. संविधान में कहा गया था कि 1965 में अंग्रेज़ी का स्थान हिंदी ले लेगी पर तमिलनाडु के कट्टर हिंदी-विरोधियों प्रदर्शनों के कारण सरकारी कामकाज आज तक अंग्रेज़ी में ही हो रहे हैं. हिंदी राजभाषा तो बन गयी पर अभी तक राष्ट्रभाषा नहीं बन पायी है.