भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जलवायु के आधार पर अलग-अलग फसलें बनकर तैयार होती हैं....जिसे लेकर अलग-अलग राज्यों के लोग अलग-अलग फसल उत्सव मनाते हैं...आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही फसल उत्सव के बारे में....
लोहड़ी
फसल की बुवाई और कटाई को लेकर ये उत्सव किसानों के लिए काफी मायने रखता है। इस दिन किसान अपनी नई फसल को अग्नि देवता को समर्पित कर लोहड़ी का पर्व मनाते हैं। लोग घरों के बाहर आग जलाकर ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं।.. इस दिन लोग, गुड़ चिड़वा, मूंगफली, रेवड़ी खाते हैं। हर साल 13 जनवरी को मनाये जाने वाले लोहड़ी उत्सव की धूम सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा में देखने को मिलती है
मकर संक्रांति
मकर संक्रांति हिंदुओं के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जिसे लोहड़ी के अगले दिन यानि 14 जनवरी को मनाया जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर मकर संक्रांति की शुरुआत होती है जिसके बाद शुभ काम शुरु कर दिए जाते हैं। राजस्थान, दिल्ली और गुजरात में इस मौके पर पतंग उड़ाये जाते हैं...तो वहीं गंगा स्नान, खिचड़ी खाना और दान का काफी महत्व है।
पोंगल
मकर संक्रांति का दूसरा नाम ही पोंगल है जिसे पूरे तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में 15 जनवरी से 18 जनवरी तक पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान यहां गन्ना, चावल, हल्दी और दालों की खेती होती है। लोग इस मौके पर सूर्य देवता की अराधना करते हैं। परंपरा के मुताबिक, पोंगल पर एक बर्तन में दूध और चावल को एक साथ उफनकर बाहर गिरने तक उबाला जाता है..ऐसी मान्यता है कि ये सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। बता दें कि पोंगल दक्षिण भारत के एक मशहूर चावल के व्यंजन का भी नाम है
भोगाली बिहू
संक्रांति को असम में भोगाली बिहू त्योहार के नाम से बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस साल 16 जनवरी को ये त्योहार मनाया जा रहा है जब सूर्य उत्तर की दिशा में गति करेगा...बिहू त्योहार का जश्न यहां के ट्रेडिशनल डांस के बिना बिलकुल ही अधूरा है....आग के चारों ओर लोग परिवार वालों के साथ जुटकर एक दूसरे को बधाईदेते हैं और भगवान का शुक्रियाअदा करते हैं।
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी त्योहार कड़कड़ाती ठंड के बाद बसंत मौसम के आने का स्वागत करता है। ये वो वक्त होता है जब खेत में सरसों के पीले फूल छाये होते हैं..गेहूं, जौ, चना की फसलें पककर तैयार हो जाती है। और नज़ारा बेहद चमकीला होता है। बसंत पंचमी के त्योहार को सरस्वती पूजा के तौर भी मनाया जाता है...इस दिन पीले रंग का काफी महत्व है..लोग जहां पीले कपड़े पहनते हैं...तो वहीं इसके अलावा बूंदी लड्डू और मीठे चावल भी खाये जाते हैं
जाहिर है...भले ही अलग-अलग राज्यों में इन त्योहारों को अलग अलग नाम से मनाया जाता है लेकिन इन त्योहारों के जरिये थैंक्स करने का उत्साह लोगों को एक साथ जोड़ता है