24 दिसंबर गुरुवार को भारत अपना 35वां उपभोक्ता दिवस मना रहा है. इसी दिन साल 1986 में देश के राष्ट्रपति ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 कानून को मान्यता दी थी. पहली बार ये दिवस साल 2000 में मनाया गया था. दरअसल उपभोक्ताओं के संगठित न होने के कारण व्यापारियों की कालाबाजारी और धांधली होती थी. ग्राहकों के पास कोई ऐसी जगह नहीं थी जहां वो शिकायत करे सकें या उनको कानूनी संरक्षण मिले. ऐसे में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने कानून का मसौदा तैयार करने का बीड़ा उठाया और ग्राहक आंदोलन को शक्ल देने के लिए देशभर के विशेषज्ञों की मदद ली गई. जो आखिरकार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विधेयक के तौर पर पारित हुआ.