मंगलवार को प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 में दर्ज हुए अवमानना के एक केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई.इस दौरान कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि कोर्ट में चल रहे मामलों पर मीडिया का टिप्पणी करना, दरअसल जजों को प्रभावित करने जैसाहै, जो ठीक नहीं है. हालांकि अदालत में प्रशांत भूषण का पक्ष रख रहे राजीव धवन अटॉर्नी जनरल से सहमत नहीं दिखे. तो वहीं इसी मामले में तहलका के पूर्व संपादक तरूण तेजपाल का पक्ष रहे कपिल सिब्बल ने कहा कि Contemp of court के कानून को संचार के नए माध्यमों से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए.भूषण के खिलाफ अवमानना का केस तहलका को दिए उनके इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ विवादास्पद बयान दिए थे.