कोरोना संक्रमण, ब्लैक, व्हाइट फंगस जैसी बीमारियों के बीच तूफान की वजह से बदलते मौसम को देखते हुए महाराष्ट्र के पिडियाट्रिशंस (बाल चिकित्सकों) और कोविड- 19 टास्क फोर्स ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मॉनसून से पहले बच्चों को फ्लू का टीका लगाए जाने की सिफारिश की है. उनका मानना है कि कोरोना और फ्लू के शुरुआती लक्षण कुछ हद तक एक जैसे होते हैं ऐसे में एहतियात के तौर पर इंफ्लूएंजा की वैक्सीन लग जाने से स्थिति को टालने में मदद मिल सकती है.
आपको बता दें कि इन्फ्लूएंजा एक सांस लेने से जुड़ा वायरल इंफेक्शन है, खांसी, सर्दी-जुकाम, बुखार, बदन दर्द इसके लक्षण होते है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो फ्लू के शॉट 6 महीने और उससे ज्यादा उम्र के सभी बच्चों को दिए जाने चाहिए. फ्लू से निमोनिया और ब्रोंकाइटिस हो सकता है. निमोनिया, फेफड़ों का संक्रमण होता है जबकि ब्रोंकाइटिस में फेफड़ों में हवा ले जाने वाली नलियों में इंफेक्शन फैल जाता है. इससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है और इसके साथ ही तेज बुखार की वजह से कभी-कभी दौरा भी पड़ने लगता हैं. फ्लू शॉट लेने के बाद इन बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. इन्फ्लूएंजा के टीके लगाने से कोरोना वायरस बीमारी के मामलों पर रोक लगाने, अस्पतालों में भीड़भाड़ कम करने और गैरजरूरी जांचों को रोकने में मदद मिलेगी.
डॉक्टर ने सभी बच्चों के माता-पिता को सलाह देते हुए कहा है कि फ्लू के टीके के अलावा, उन्हें बच्चों की हाइजीन पर भी ध्यान दें. इसके अलावा बच्चों को बीमार लोगों से दूर रखें, मानसून नजदीक होने की वजह से (UNHE) उबला हुआ पानी पिलाएं और बाहर का कुछ भी खिलाने से बचें. जिससे बच्चों को संक्रमण से काफी हद तक दूर रखने में मदद मिलेगी.