देशभर में भले ही होली का त्योहार (Holi Festival) 29 मार्च को मनाया जाए लेकिन राधा-कृष्ण (Radha-Krishna) की भूमि मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और पूरे ब्रज भूमि में तो रंग-गुलाल एक हफ्ते पहले से ही उड़ने शुरू हो जाते है. राधा रानी के मंदिर में लड्डू की होली (Ladoo ki Holi) के साथ होली परंपरा की शुरुआत हो गयी. और लड्डू के बाद बरसे लट्ठ. यानी खेली गयी लट्ठमार होली. लोग यहां फूल, रंग और गुलाल के साथ ही लाठी-डंडों से भी होली खेलते नजर आये.
लट्ठमार होली खेलने वाले पुरुषों को हुरियारे और महिलाओं को हुरियारन कहा जाता है. नंदगांव के हुरियारे बरसाना में हुरियारनों संग लट्ठमार होली खेलने आते हैं. पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरसाना में राधा रानी का जन्म हुआ था. ऐसी मान्यता है कि जब राधा और कृष्ण की दोस्ती हो गई तो श्रीकृष्ण, राधा से मिलने अपने दोस्तों संग नंदगांव से बरसाना आते थे. इस दौरान भगवान कृष्ण, गोपियों संग खूब होली खेलते थे और उन्हें परेशान करते थे, जिसके बाद राधा और उनकी सहेलियां उन्हें लाठियों से मारती थीं. तभी से लट्ठमार होली खेलने की परंपरा चली आ रही है. होली के मौके पर हर साल बरसाना में लट्ठमार होली खेलने की परंपरा को निभाया जाता है.