हर कृष्ण भक्त को जन्माष्टमी का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार रहता है. इस दिन सभी कृष्ण भक्त भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहते हैं. घर और मंदिरों में कृष्ण लीलाओं की झांकियां सजाई जाती हैं. लोग व्रत और पूजन कर भगवान कृष्ण की आराधना करते हैं.
ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के अनुसार, इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर 6 तत्वों के विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है. जो बहुत ही दुर्लभ माना जा रहा है. इस बार जन्माष्टमी पर भाद्र कृष्ण पक्ष, रोहिणी नक्षत्र, अर्धरात्रि कालीन अष्टमी तिथि, वृष राशि में चंद्रमा और सोमवार का होना बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है.
अष्टमी तिथि 29 अगस्त रात 11 बजकर 25 मिनट से 30 अगस्त रात 01 बजकर 59 मिनट तक ही रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी.
इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहे दुर्लभ संयोग में व्रत रखने व पूजा करने का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस अद्भुत संयोग में कृष्ण भगवान की विधि विधान से पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है, तथा भक्तों को भगवत कृपा प्राप्त होती है.
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