अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जीवित्पुत्रिका का निर्जला व्रत किया जाता है. इस व्रत को माताएं अपनी संतान को कष्टों से बचाने और लंबी आयु की मनोकामना के लिए करती हैं. कुछ जगहों पर इसे जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में यह व्रत प्रमुखता से रखा जाता है. जितिया व्रत के रोज तीन कार्य पूरी तरह से वर्जित हैं. इस दिन बाल और नाखून नहीं काटे जाते. व्रत के दिन घर का कोई सदस्य मांस-मदिरा का सेवन न करे. व्रत करनेवाली माताएं झूठ बोलने से परहेज करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-निधान से किया गया व्रत संतान को सभी मुश्किलों से बचाता है.