हमारी आज़ादी अब 7 दशक पार कर चुकी है, हर तरह के उतार चढ़ाव के साथ देश के सिनेमा ने भी इन सात दशकों में परिपक्वता का सफर तय किया है. हिंदी और अंग्रेजी सिनेमा की बात तो हम अक्सर करते हैं, पर भारत तो भाषाओं का देश है, लिहाजा आइये आपको रीजनल सिनेमा की ऐसी 7 फिल्मों के बारे में बताते हैं, जिसने समाज की सोच और समझ पर प्रभाव डाला.
1. मंडेला, तमिल
अगर आप हल्के फुल्के व्यंग के जरिए देश में मौजूद राजनीति और जातीय समीकरणों का खेल समझना चाहते हैं, तो फटाफट तमिल फिल्म मंडेला देख डालिए. ये एक जबरदस्त पॉलिटिकल सैटायर और कॉमेडी है. फिल्म की कहानी तमिलनाडु के एक गांव की है, जहां चुनाव होने वाले हैं और वोटों के समीकरण वाली गेंद एक हेयरड्रेसर के हाथ में आ जाती है, इसी शख्स का नाम मंडेला है.
मंडेला के किरदार में योगी बाबू ने जान डाल दी है. फिल्म की खासियत है इसका लाइट कॉमिक ट्रीटमेंट, जो बड़ी और गहरी बात भी ह्यूमर के साथ समझा जाता है. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी लाजवाब है जो अपने शानदार सीक्वेंस में बिना फिल्टर के मानो पूरे गांव और उसकी हर बात को पर्दे पर उतार देता है. इस फिल्म को मैडोन अश्विन ने लिखी और डायरेक्ट की है, कमाल की बात ये है कि अश्विन की ये डेब्यू फिल्म है.
2. द ग्रेट इंडियन किचन, मलयालम
द ग्रेट इंडियन किचन, एक ऐसी कहानी है जो हर भारतीय पुरुष को देखनी चाहिए. ये फिल्म किचन और खाना बनाने को लेकर आपकी सोच को पूरी तरह से बदल देगी. राइटर -डायरेक्टर जियो बेबी की ये मलयाली फिल्म भारतीय घरों में मौजूद पितृसत्ता को प्याज़ के छिलकों की तरह परत दर परत उघाड़ देती है.
घरेलू कामों के महिमामंडन के जरिए पेट्रियार्की किस तरह महिलाओं की कंडिशनिंग करती है, ये देखने लायक है. फिल्म का कोई किरदार महिलाओं के साथ हिंसक व्यवहार नहीं करता, लेकिन पितृसत्ता अपने आप में कितनी मूक हिंसा से भरी होती है, ये देखने लायक है.
3. विसारनाय, तमिल
एम चंद्रकुमार के नॉवेल लॉक अप पर बनी विसारनाय उन फिल्मों में से है, जिसे देखने के बाद आप खुद को कई सवालों से घिरा पाएंगे. कहानी सच्ची घटना से प्रेरित है, और तमिलनाडु के चार मज़दूरों के इर्द गिर्द घूमती है.
फिल्म लॉक- अप के अंदर पुलिस की ज्यादतियों को भी तीखे ढंग से दिखाती है. वेनिस में हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को मानवाधिकारों की संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ‘सिनेमा फॉर ह्यमून राइट्स’ का पुरस्कार दिया था. फिल्म 2017 में भारत की ओर से ऑस्कर की ऑफिशियल एंट्री भी थी.
4. जल्लीकट्टू, मलयाली
मलयाली फिल्म जल्लीकट्टू एक ऐसी फिल्म है जिसे ना सिर्फ पर्दे पर कामयाबी मिली है, बल्कि समीक्षकों की तारीफ भी इस फिल्म को हासिल हुई. भारत की ओर से 93वें ऑस्कर में भेजी गई ये फिल्म भले ही अपनी जगह एकेडमी अवार्ड्स में बनाने में कामयाब नहीं रही, लेकिन इसे दर्शकों के दिलों में अच्छी -खासी जगह मिली.
फिल्म की कहानी एक भैंसे से जुड़ी है, जो एक कसाई की पकड़ से भागकर गांव में उत्पात मचाता है. गांव का हर शख्स उसे पकड़ने की कोशिश में जुट जाता है. लेकिन इसी भागमभाग में कई और कहानियां भी साथ-साथ चलती हैं. इन कहानियों में गांव की गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी जैसी समस्याओं को उठाया गया है.
5. द कोर्ट, मराठी
साल 2016 में भारत की ओर से ऑस्कर के लिए भेजी गई मराठी फिल्म कोर्ट में देश की लचर न्यायिक प्रणाली को दिखाया गया है. कहानी नारायण कांबले नाम के एक कवि और आंदोलनकारी के इर्द-गिर्द बुनी गई है. उनपर मैनहोल वर्कर को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया जाता है. फिल्म के कोर्ट रूम सीन बेहद अच्छे और जानदार हैं, एक-एक डायलॉग आपको सरोकारों और सिस्टम के बीच के द्वंद को समझने का नया नज़रिया देगा.
6. हेलारो, गुजराती
हेलारो एक ऐसी गुजराती फिल्म है, जो कच्छ के मरूस्थल में महिला सशक्तिकरण की पृष्ठभूमि पर बनी है. फिल्म की कहानी एक गांव की कुछ असली तो कुछ लोक कथाओं पर आधारित है.
विपरीत परिस्थितियों में महिला सशक्तिकरण की ये कहानी अद्भुत है. अपनी खास कहानी और ट्रीटमेंट की वजह से लो बजट की इस फिल्म की झोली में देशी विदेशी कई अवार्ड्स आए.
दिसंबर 2019 में इटली में आयोजित रिवर टू रिवर फ्लोरेंस इंडियन फिल्म फेस्टिवल में इसे आधिकारिक रूप से स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था, इसे ऑडियंस अवॉर्ड भी मिला था.
7. विलेज रॉकस्टार, असमिया
रीमा दास के डायरेक्शन में बनी असमिया फिल्म विलेज रॉकस्टार ऐसे बच्चों की कहानी है जो हैं तो गरीब , लेकिन उनके सपने बड़े हैं, और उन सपनों को पाने की ललक भी बड़ी है. कहानी गाँव की एक बच्ची धुनू के सपने के इर्द गिर्द घूमती है. धुनू को गिटार बजाना बहुत पसंद है और वह गाँव के लड़कों को लेकर अपना खुद का एक बैंड बनाना चाहती है. फिल्म उसके सपने और संघर्ष को बड़े खूबसूरत तरीके से दिखाती है. विलेज रॉकस्टार को 91वें ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर चुना गया था.