ज्योतिष के जानकारों की मानें तो भगवान शिव के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व है. शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते है. आइये जानते हैं भगवान् शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र. आपने देवताओं और दानवों के सागर मंथन की कथा तो सुनी ही होगी. इस मंथन के दौरान हलाहल नाम का विष भी निकला जिसका प्रभाव इतना था कि समस्त विश्व विनाश की और बढ़ने लगा. किसी में इतनी शक्ति भी नहीं थी कि उस विष के जानलेवा प्रभाव को रोक सके. तब भगवान शिव ने पूरी सृष्टि को बचाने के लिए इस विष को अपने कंठ में धारण किया था. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया. भगवान ने विष को कंठ में धारण तो कर लिया लेकिन इससे उनका पूरा शरीर गरम हो गया. जिसकी वजह से आसपास का वातावरण भी जलने लगा. चूंकि बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करता है इसलिए सभी देवी देवताओं ने भगवान शिव को बेल पत्र खिलाना और जल चढ़ाना शुरू कर दिया. बेलपत्र और जल के प्रभाव से भोलेनाथ के शरीर में उत्पन्न गर्मी शांत होने लगी. तभी से शिव पर जल और बेलपत्र चढ़ाने की प्रथा चल पड़ी.