Ajit Pawar Profile: एनसीपी नेता शरद पवार के भतीजे अजित पवार 35 विधायकों संग शिंदे सरकार में शामिल हो गए हैं. रविवार को उन्होंने 9 मंत्रियों संग डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. इससे पहले अजित, उद्धव सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके हैं. महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार में भी पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था. आइये जानते हैं कैसा रहा अजित पवार के 41 साल का राजनीतिक जीवन.
शरद पवार के बड़े भाई के बेटे अजित पवार ने साल 1982 में अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत की थी. उन्होंने सबसे पहले महाराष्ट्र में को-ऑपरेटिव चुनाव लड़ा था जिसमे जीत हासिल कर राजनीतिक सफर में सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ी. अजित पवार की ज़िन्दगी में साल 1991 में सबसे बड़ा मोड़ आया जब वो पुणे डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमेन नियुक्त हुए. साल 1991 में पवार ने अपना गढ़ माने जाने वाले बारामती सीट से लोकसभा का चुनाव जीता. हालांकि कुछ ही समय बाद पावर ने चाचा शरद के लिए ये सीट छोड़ दी. इस सीट पर उपचुनाव जीत कर शरद पवार पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बनाए गए थे.
बारामती लोकसभा सीट छोड़ने के बाद अजित पवार को विधानसभा चुनाव में मौक़ा दिया गया और इस तरह पवार राज्य सरकार में मंत्री बनाये गए. इस जीत के बाद लगातार अजित पवार ने 1995, 1999, 2004, 2009, और 2014 विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की. राज्य में कई बार पवार को अहम विभाग और जिम्मेदारियां दी गई. इस बीच विवादों से भी उनका गहरा नाता रहा. साल 1999 से 2009 के बीच सिचाई मंत्रालय संभालने वाले अजित पवार पर 20 हजार करोड़ के घोटाले का भी आरोप लगा. जिसे विपक्ष ने खूब तूल दिया था.
साल 2010 में NCP-कांग्रेस सरकार में अजित पवार ने पहली बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 23 नवंबर 2019 को अजित पवार ने अपनी पार्टी की सहमति के बिना भाजपा के साथ महाराष्ट्र के डिप्टी CM के रूप में शपथ ली. उन्होंने NCP विधायकों के हस्ताक्षर वाला कागज राज्यपाल को सौंपा था. वह 80 घंटे से भी कम समय तक इस पद पर रहे और देवेन्द्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली सरकार में सबसे कम कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री बने. 1 दिसंबर 2019 के दिन यह घोषणा की गई कि 16 दिसंबर को राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद पवार महा विकास अघाड़ी प्रशासन के लिए उप मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया.