हिंदी दिवस: वो 5 कदम जिससे हिंदुस्तान में और मजबूत हो सकती है 'हिंदी'

Updated : Sep 14, 2020 12:12
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Editorji News Desk

14 सितंबर 1949 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया और 1953 से पूरे भारत में इस दिन को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा. केंद्र सरकार राजभाषा हिंदी सीखने के लिए अपने कर्मचारियों को आर्थिक प्रोत्साहन देती है. इसके तहत सेवा में रहते हुए हिंदी की परीक्षा पास करनी होती है. उसके बाद कर्मचारियों को एक निश्चित समय पर तय राशि दी जाती है. बावजूद इसके हिंदुस्तान में हिंदी की स्थिति बेहद कमज़ोर है. भाषाविदों के सुझाव के मुताबिक कुछ अहम कदम उठाकर हिंदी भाषा को हिंदुस्तान में मजबूती दिलाई जा सकती है.

हिंदी के सरकारी शब्दकोशों और दस्तावेजों से कठिन शब्द को हटाना जरूरी 

शब्दों के मामले में किसी भी भाषा के प्रचलित शब्दों को स्वीकारने की नीति हो

डिजिटल जमाने में बच्चों को कागज पर हिंदी लिखना सिखाने के साथ-साथ उन्हें हिंदी टाइपिंग में भी दक्ष बनाया जाना चाहिए

देश में इंटरनेट पर करीब 20 प्रतिशत लोग हिंदी में सामग्री खोजते हैं, हिंदी कंटेंट पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए

केंद्र सरकार का राजभाषा विभाग अभी गृह मंत्रालय के तहत काम करता है. इसका जिम्मा कई बार अहिंदी-भाषी मंत्री के जिम्मे होता है. ऐसे मंत्री हिंदी के विकास में रुचि नहीं लेते. राजभाषा विभाग को पर्याप्त अधिकार और बजट भी सौंपने की जरूरत है.

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