Tokyo Olympics 2021: लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला खिलाड़ी....वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय....बैडमिंटन के कोर्ट पर चीन और कोरिया के डॉमिनेंस को कड़ी चुनौती देने वाली सबसे बड़ी खिलाड़ी...अब आप समझ ही गए होंगे कि हम किस की बात कर रहे हैं...यदि अब भी कोई कन्फ्यूजन है तो आपको बता दें हम बात कर रहे हैं पीवी सिंधु (PV Sindhu) की.
लेकिन क्या आपको पता है. बैडमिंटन की कोर्ट पर धमाल मचाने वाली सिंधु शुरू में डॉक्टर बनना चाहती थीं. वैसे तो 8 साल की उम्र में ही उन्होंने रैकेट थाम लिया था लेकिन तब वे सिर्फ मजे के लिए बैडमिंटन खेलती थी. वक्त बीतने के साथ वो बैडमिंटन के प्रति गंभीर होती गईं और आज अंजाम सबके सामने है. भारत की ऑलटाइम ग्रेट शटलर सिंधु की उपल्ब्धियां अविश्वनीय हैं.आइए इसी पर एक नजर डाल लेते हैं.
महज 17 साल की उम्र में दुनिया की टॉप-20 खिलाड़ियों में शामिल
साल 2013 से लेकर 2019 तक छह मेडल जीते वर्ल्ड चैंपियनशिप में
साल 2016 के रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय
साल 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिक्स्ड इवेंट में गोल्ड मेडल जीता
साल 2019 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सिंधु ने गोल्ड मेडल जीता
साल 2013 में अर्जुन अवॉर्ड, 2015 में पद्मश्री, 2016 में खेल रत्न से सम्मानित
साल 2020 में BBC ने इंडियन स्पोर्ट्स वूमन ऑफ द ईयर घोषित किया
फॉर्ब्स की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली खिलाड़ियों की लिस्ट में 13वां नंबर
5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में जन्मीं पीवी सिंधु के खून में ही खेल है. उनके माता-पिता राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी थे. उनके पिता को तो अर्जुन अवॉर्ड भी मिल चुका है. ये भी एक बड़ी वजह है जिसने सिंधु को खेल के इस मुकाम पर पहुंचाया. लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए सिंधु ने पहाड़ों का सीना चीरने जैसी मेहनत की है.
पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) से ट्रेनिंग लेने के लिए वे रोजाना 56 किलोमीटर का सफर तय कर उनके एकेडमी जाया करती थीं. इसी दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी. इन सबके बीच ही वो महज 17 साल की उम्र में एशियन जूनियर चैंपियनशिप जीत ली थी.
हालांकि टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में वो फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाईं तो निराश हो गईं. लेकिन तभी उनके पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और कहा आपको पूरी कोशिश करनी है. उनमें जूझने का माद्दा गजब है. इसी का परिणाम है कि उन्होंने चीन की ही बिंग जियाओ को हराकर कांस्य पदक (Olympic Bronze Medal) जीत लिया.
आपको बता दें कि फॉर्ब्स की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली महिला खिलाड़ियों की लिस्ट में वे एकमात्र भारतीय हैं. वो बैंक ऑफ बड़ौदा, ब्रिजस्टोन, जेबीएल, पैनासोनिक और दूसरे कई बड़े ब्रांड्स का विज्ञापन कर चुकी हैं.
फॉर्ब्स उन्हें भारत की मोस्ट मार्केटेबल महिला खिलाड़ी भी बता चुका है. सलाम है सिंधु को.