किसी मेसेज का ओरिजिन बताने के सरकारी आदेश को निजता का उल्लंघन बताते हुए WhatsApp ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इसपर बुधवार को केंद्रीय IT मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार निजता के अधिकार का पूरा सम्मान करती है, और किसी मेसेज का ओरिजिन बताना निजता का उल्लंघन नहीं है. मंत्रालय ने कहा कि ऐसी जरूरत सिर्फ उन गंभीर मामलों के लिए है जब किसी खास मेसेज पर रोक लगानी हो, उसकी जांच करनी हो या फिर सजा देनी हो, जैसे कि यौन सामग्री वाले मामले. सरकार ने कहा कि एक तरफ तो WhatsApp, IT अधिनियम के प्रावधानों के तहत सरकार से सुरक्षा चाहता है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश भी कर रहा है.
सरकार बोली कि WhatsApp जहां यूजर्स के डेटा को फेसबुक के साथ साझा कर रहा प्राइवेसी पॉलिसी को अनिवार्य बनाने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के नियमों से उसको आपत्ति भी है. IT मंत्रालय ने कहा कि भारत में हो रहे सभी काम यहां के कानून के मुताबिक ही होंगे. आपको बता दें कि सरकार का सोशल मीडिया के लिए नया कानून 26 मई से लागू हो गया है, इसके तहत सरकार के अफसर जब चाहें किसी मेसेज को रोक सकते हैं या उस मेसेज भेजने वाले का सारी कुंडली सोशल मीडिया कंपनियों को निकालने के लिए कह सकते हैं. इसे लेकर सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि सरकार दरअसल इसके जरिए सरकार विरोधी मेसेज पर लगाम कसने की कोशिश कर रही है.