हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजा जाता है. सभी देवों में प्रथम आराध्य देव श्री गणेश को गणपति, लंबोदर, विनायक, एकदंत, गजानन और कई दूसरे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है. वैसे तो हर महीने की चतुर्थी तारीख को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है लेकिन भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है. इस साल ये विशेष दिन 10 सितंबर को मनाया जा रहा है.
गणेश चुतर्थी के दिन लोग अपने घरों में अपनी श्रद्धा के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करते हैं. इसके साथ ही गणेश उत्सव का त्योहार शुरू हो जाता है जो 10 दिनों तक चलता है. गणेश चतुर्थी के आखिरी दिन यानि अनंत चतुर्दशी को गणेश जी का विसर्जन की परंपरा है. लेकिन कई लोग पूरे आदर-सत्कार के साथ बप्पा को एक, तीन, पांच या दस दिन अपने घर पर रखते हैं और इसके बाद इनका विधि-विधान के साथ विसर्जन करते हैं. लेकिन क्या कभी आपने इस बात पर गौर किया है कि जिन्हें हम इतने आदर-सत्कार के साथ घर लाते हैं उन्हें हम विसर्जित क्यों कर देते हैं?
गणेश विसर्जन को लेकर कई पौराणिक कथाएं है जिनका वेदों और पुराणों में ज़िक्र किया जाता है, जिनमें से एक कथा महाभारत से भी जुड़ी है. चलिये बताते हैं.
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पुराणों के अनुसार, श्री वेद व्यास जी ने गणपति जी को गणेश चतुर्थी से महाभारत की कथा सुनानी शुरू की थी. गणपति जी उस कथा को लिख रहे थे. इस दौरान व्यास जी आंख बंद कर लगातार 10 दिनों तक कथा सुनाते रहे और गणपति जी लिखते गए. 10 दिनों बाद जब व्यास जी ने आंखें खोलीं तो उस समय गणपति के शरीर का तापमान काफी ज़्यादा बढ़ गया था, जिसकी वजह से व्यास जी ने उनके शरीर को ठंडा करने के लिए जल में डुबकी लगवाई. तभी से मान्यता है कि 10वें दिन गणेश जी को शीतल करने के लिए उनका विसर्जन किया जाता है.
ऐसे करें पूजा:
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके गणपति के व्रत का संकल्प लें. इसके बाद दोपहर के समय गणपति की मूर्ति या फिर उनका चित्र लाल कपड़े के ऊपर रखें. फिर गंगाजल छिड़कने के बाद भगवान गणेश का आह्वान करें. भगवान गणेश को फूल, सिंदूर, जनेऊ और दूर्वा (घास) चढ़ाएं. इसके बाद गणपति को मोदक लड्डू चढ़ाएं, मंत्रोच्चार के साथ उनकी पूजा करें, गणेश जी की कथा पढ़ें या सुनें, गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें.
ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन लाल या पीले रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.