सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने दहेज (dowry) हत्या के एक मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि दहेज की मांग अगर विवाहिता की मौत से काफी पहले भी की गई थी तो ये दहेज हत्या का मामला माना जाएगा क्योंकि दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या में करीबी संबंध है. टॉप कोर्ट ने कहा कि दहेज हत्या की धारा 304-B में लिखे ‘सून बिफोर’ यानी ठीक पहले को ‘इमिडिएट बिफोर’ तत्काल पहले के तौर पर नहीं पढ़ा जा सकता.
दहेज हत्या के मामलों में अभियुक्तों के अंतिम बयान दर्ज करते समय ट्रायल कोर्ट के नरम रवैये पर भी कोर्ट ने चिंता व्यक्त की. टॉप कोर्ट ने कहा कि कई बार ऐसे मामलों में पति के परिजनों को फंसाने की साजिश की जाती है इसलिए अदालतों को निष्पक्षता और सावधानी के साथ सवाल पूछने चाहिए.