हैंडलूम को भारत की संस्कृति और आर्थिक ताने बाने में गहराई से बुना जाता है। ये सेक्टर अलग अलग उत्पादन स्तरों पर 43 लाख से ज्यादा अधिक वर्कर्स को रोजगार देता है और इसीलिए रोजगार देने के मामले हैंडलूम एग्रीकल्चर के बाद दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। दुनिया के लगभग 95% हाथ से बुने हुए कपड़े हमारे देश में बनाए जाते हैं। पिछले कुछ सालों में सरकार इस कुटीर उद्योग को और सशक्त बनाने और वैश्विक तौर पर देश की संस्कृति को दिखाने के लिए अलग अलग तरह से हैंडलूम को प्रोमोट कर रही है। जहां आज के कुछ लोग ये सोचते हैं कि हैंडलूम केवल दादी या नानी के समय का है, वहीं, ये हैं कुछ फैशन डिजाइनर्स जो वैश्विक तौर पर हैंडलूम के बदले हुए चेहरे से परिचित करा रहे हैं।
गौरांग शाह
जाने-माने टेक्सटाइल डिजाइनर गौरांग शाह का जामदानी को लेकर प्रेम आम नहीं है। खुद से सीखी अपनी बुनाई के कामों से उन्होंने ये साबित किया है कि ऐसा कोई भी टेक्सचर, पैटर्न, कलर या फिर डिजाइन नहीं है जिसे बंगाल के जामदानी के साथ नहीं बनाया जा सकता।
गौरव जय गुप्ता
दिल्ली के रहने वाले डिजाइनर गौरव जय गुप्ता मेरिनो वुल और चंदेरी जैसे बेहतरीन फेब्रिक्स पर स्टील और कॉपर जैसे मेटल्स को इंटरमिक्स करते है जिससे फैब्रिक को एक इंटरनेशनल अपील मिलती है।
अनाविला मिश्रा
अगर आप लिनेन पहनने की सोच रहे हैं तो अनविला मिश्रा के लिनेन साड़ियों से बेहतर कुछ और नहीं हो सकता। अनविला इंडियन क्राफ्ट को फिर से परिभाषित करने में विश्वास करती है इसके लिए वो वो लिनेन समेत दूसरे हाथ से बुने हुए मैटेरियल पर भी काम करती है लेकिन उनकी लिनेन साड़ियां एक पहचान बन गई है
अनीता डोंगरे
फैशन इंडस्ट्री में 30 साल के अपने लंबे सफर में भारत की सबसे सफल डिजाइनर अनीता डोंगरे अपने कलैक्शन में हैंडलूम का बेहरतरीन इस्तेमाल करती हैं। ट्रेडिशनल साड़ी और सूट के अलावा अनीता के वेस्टर्न कलेक्शन में इंडियन हैंडलूम का बेहतरीन नमूना देखने को मिलता है।
सुकेत धीर के कूल समर वु्ल और सामंत चौहान के भागलपुर सिल्क से लेकर Eleven Eleven, Ekaya Benaras, Raw Mango जैसे ब्रांड्स तक, डिजाइनर्स के एक समूह ने ट्रेडिशनल वीविंग और हैंडलूम सेक्टर को फिर से जिंदा करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं