अपने ही देश में, अपनी ही पार्टी के निशाने पर आए नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी बचाने के लिए अब चीन आगे आया है. चीन के इशारे पर भारत विरोधी स्टैंड के लिए विरोध झेल रहे पीएम ओली के बचाव में चीनी राजदूत हाओ यांकी लगातार प्रयास कर रही हैं. नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते चीनी राजदूत ने राष्ट्रपति बिद्या भंडारी और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव कुमार नेपाल से गुप्त मुलाकात की. रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति कार्यालय में तैनात विदेश मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी को भी राष्ट्रपति भंडारी और चीनी राजदूत के बीच बैठक के बारे में सूचित नहीं किया गया था. चीनी राजदूत के इस कदम को नेपाल की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप माना जा रहा है. वहीं कई पूर्व राजनयिकों और राजनेताओं ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई है.