निजीकरण के खिलाफ देशभर में सरकारी बैंक कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को हड़ताल पर है. यूनाइडेट फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के तहत 9 यूनियनों ने इस दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है. इनका दावा है कि हड़ताल में 10 लाख कर्मचारी शामिल हैं.
वहीं इस बंद के चलते सरकार के साथ-साथ आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस बंद से कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा. मसलन बैंकों के बंद रहने से एनईएफटी के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस अटक जाएंगे, चेक क्लीयरेंस, एटीएम कामकाज समेत कई अहम सेवाएं इस हड़ताल की वजह से अटकने की उम्मीद है.
खबरों के मुताबिक वीकएंड्स को मिला कर सोमवार और मंगलवार को बैंकों के 4 दिन लगातार बंद रहने से करीब 50,000 करोड़ रुपये से 70,000 करोड़ रुपये रोजाना होने का अनुमान है.