गीता के संदेश के जरिए मानवता को कृतार्थ करने वाले भगवन श्री कृष्ण का पूरा जीवन ऐसे प्रसंगों से भरा हुआ है जिनसे प्राप्त शिक्षाओं के जरिए हम अपने जीवन को एक बेहतर अवसर में बदल सकते हैं. क्या हैं वो पांच अहम शिक्षाएं जो हमें भगवन कृष्ण के व्यक्तित्व से अपनानी चाहिए आइए जान लेते हैं:-
1- शांत मन, स्थिर स्वभाव: कृष्ण के जन्म से ही मामा कंस से लेकर कई अन्य विपत्तियां उनके जीवन में आई लेकिन उन्होंने सबका चेहरे पर एक मुस्कान, शांत चित और स्थिर स्वभाव से मुकाबला किया और सभी पर विजय पाई.
2- माता-पिता का सम्मान: कृष्ण संतान तो देवकी और वासुदेव की थे लेकिन उनका लालन-पोषण यशोदा और नंद जी ने किया. ये जानते हुए भी कृष्ण ने कभी इन दोनों में कोई भेद नहीं किया और आज भी उन्हें देवकी नंदन और यशोदा के नंद लाल से ही पहचाना जाता है.
3- नर में देखा नारायण: यूं तो कृष्ण खुद नारायण का अवतार थे और गोकुल राजवंश में पैदा हुए थे लेकिन उन्होंने कभी भी किसी अन्य व्यक्ति को छोटा नहीं समझा और सामान्य बालकों के साथ खेल कूद कर बड़े हुए.
4- मित्रता परमो धर्म: पहले अपने बाल सखा सुदामा और बाद में अर्जुन से दोस्ती निभा कर कृष्ण ने मित्रता की वो परिभाषा गढ़ी जिसकी आजतक मिसाल दी जाती है. उन्होंने बताया कि एक दोस्त का क्या कर्तव्य है और कैसे इस रिश्ते को निभाना चाहिए.
5- हार ना मानने की प्रवर्ति: कृष्ण में जीवटता कूट-कूट कर भरी थी. परस्थिति भले ही जो भी रही उन्होंने कभी हार नहीं मानी और तब तक प्रयत्नशील रहे जब तक जीत सुनिश्चित नहीं हो गई.