पिछले दिनों Ashoka University से प्रोफेसर भानु प्रताप मेहता और अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम के इस्तीफे के खिलाफ विरोध के स्वर और तेज हो रहे हैं. अब रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ( Raghuram Rajan) ने इसकी तीखी आलोचना करते हुए यूनिवर्सिटी के प्रशासकों को निशाने पर लिया है. रघुराम राजन ने लिखा है कि, भारत में इस सप्ताह अभिव्यक्ति की आजादी को गंभीर झटका लगा है. देश के बेहतरीन राजनीतिक टिप्पणीकार प्रोफेसर मेहता ने अशोका यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि सचाई यह है कि प्रोफेसर मेहता किसी संस्थान के लिए ‘कांटा’ थे, सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए अपनी जबर्दस्त दलीलों से कांटा बने हुए थे. उन्होंने आगे कहा कि - अभिव्यक्ति की आजादी इस महान यूनिवर्सिटी की आत्मा है. इसपर समझौता कर यूनिवर्सिटी के संस्थापकों ने इस आत्मा को चोट पहुंचाई है. उन्होंने कहा कि अगर आप अपनी आत्मा को ‘बेचने’ की मंशा रखते हैं, तो क्या इससे दबाव समाप्त हो जाएगा.
वहीं Yale, MIT, Harvard जैसे दुनिया भर के बेहतरीन संस्थानों से जुड़े करीब 150 बुद्धजीवियों ने भी अशोका यूनिवर्सिटी के प्रशासकों को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें प्रोफेसर भानु प्रताप मेहता और अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम के इस्तीफों को अकादमिक आजादी पर हमला बताया गया है.