दुनियाभर के हर तीन में से एक बच्चे के खून में लेड यानि सीसे की मात्रा बहुत ज्यादा है, जिससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत बिगड़ रही है। UNICEF की नई स्टडी में ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
यूनिसेफ और पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था 'प्योर अर्थ' की ओर से की गई स्टडी के मुताबिक, खून में लेड की अधिक मात्रा से बच्चों का मानसिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाता है। उनका नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है इसके अलावा दिल और फेफड़ों समेत कई अंग सही से काम नहीं करते।स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 80 करोड़ बच्चों के शरीर में लेड की मात्रा 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे ज्यादा है।
WHO और अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी इस समस्या को बेहद गंभीर बताया है।
रिपोर्ट बताती है कि बच्चों में लेड सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण, बैटरी रीसाइक्लिंग, ओपन-एयर स्मेलटर्स के चलते जाता है...सबसे अधिक जिम्मेदार कार का बैट्रियों को माना गया है क्योंकि गलत रिसाइक्लिंग के तरीके से दुनिया भर का करीब 85 फीसदी लेड इन्हीं बैट्रियों से आता है.